मीरजापुर। विश्व मानव तस्करी विरोधी दिवस के अवसर पर आस्था महिला एवं बाल विकास संस्था ने जनपद में बाल तस्करी की रोकथाम के लिए व्यापक जनजागरूकता एवं सामुदायिक सहभागिता अभियान चलाने की घोषणा की है। यह अभियान नई दिल्ली से शुरू हुए नेशनल कैंपेन अगेंस्ट चाइल्ड ट्रैफिकिंग के समर्थन में संचालित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य वर्ष 2030 तक बाल तस्करी का प्रभावी उन्मूलन करना है।
अभियान के तहत ग्राम पंचायतों, विद्यालयों, शहरी बस्तियों और संवेदनशील क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही समुदाय आधारित बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत करने, संवेदनशील परिवारों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने तथा संदिग्ध तस्करी नेटवर्क की सूचना संबंधित विभागों तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित राष्ट्रीय परामर्श के दौरान इस राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत हुई। इसमें देश के 782 जिलों से 250 से अधिक नागरिक समाज संगठनों ने भाग लेकर बाल तस्करी के विरुद्ध साझा रणनीति पर सहमति व्यक्त की।
संस्था के निदेशक संतोष कुमार पांडे ने कहा कि बाल तस्करी बच्चों के अधिकारों और मानव गरिमा पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि गरीबी, अशिक्षा और जागरूकता की कमी का फायदा उठाकर मासूम बच्चों को झूठे प्रलोभन देकर तस्करी का शिकार बनाया जाता है।
उन्होंने बताया कि संस्था जिला प्रशासन, पुलिस, श्रम विभाग, शिक्षा विभाग, बाल कल्याण समिति और जिला बाल संरक्षण इकाई के साथ समन्वय स्थापित कर बाल तस्करी की रोकथाम, बचाव, पुनर्वास और सामाजिक पुनर्स्थापन की दिशा में लगातार कार्य करती रहेगी।
संस्था ने जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, ग्राम प्रधानों, स्वयंसेवी संगठनों, युवा समूहों और आम नागरिकों से बाल तस्करी के विरुद्ध जागरूकता फैलाने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तत्काल सूचना प्रशासन और पुलिस को देने की अपील की।
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