कृष्ण-सुदामा मिलन और गोपी-उद्धव संवाद सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
कामता नाथ सिंह
रायबरेली। छतोह ब्लॉक के पूरे बैशन मजरे बभनपुर गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन प्रख्यात कथावाचक धर्मेशहरि महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, कृष्ण-सुदामा मिलन, गोपी-उद्धव संवाद और राजा परीक्षित के मोक्ष का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
कथावाचक ने शिव के शाप से कामदेव के भस्म होने और द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न के रूप में उनके जन्म की कथा सुनाई। इसके साथ ही सत्राजित और श्यामंतक मणि के प्रसंग, जामवंती से विवाह तथा भगवान श्रीकृष्ण के विवाहों का वर्णन किया। उन्होंने भौमासुर के वध के बाद उसके बंधन से मुक्त कराई गई 16 हजार 100 कुमारियों के प्रसंग को भी विस्तार से सुनाया।
कथा के प्रमुख प्रसंगों में कृष्ण-सुदामा मिलन ने श्रद्धालुओं को विशेष रूप से भावुक कर दिया। कथावाचक ने बताया कि पत्नी सुशीला के आग्रह पर सुदामा अपने बालसखा भगवान श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे। मित्र की दीन-हीन दशा देखकर भगवान भावुक हो गए और उन्हें गले लगा लिया। इसके बाद उन्होंने सुदामा को अपने सिंहासन पर बैठाकर स्वयं उनके चरण पखारे।
सुदामा द्वारा भेंट में लाए गए दो मुट्ठी चावल को भगवान ने प्रेमपूर्वक स्वीकार किया। कथावाचक ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने मित्र को अपार वैभव प्रदान किया। यह प्रसंग सच्ची मित्रता, प्रेम और समर्पण का अनुपम उदाहरण है। कथा सुनते समय पंडाल में मौजूद कई श्रद्धालु भावुक हो उठे।
इसके बाद गोपी-उद्धव संवाद के माध्यम से भगवान के प्रति गोपियों के अनन्य प्रेम और भक्ति का वर्णन किया गया। कथावाचक ने राजा परीक्षित को मिले शाप, तक्षक नाग के प्रसंग तथा श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से उन्हें मोक्ष प्राप्त होने की कथा भी सुनाई। शुकदेव महाराज की विदाई के प्रसंग के साथ कथा का विश्राम हुआ और विधिवत भागवत पूजन संपन्न कराया गया।
इस अवसर पर मुख्य यजमान श्रीमती गीता सिंह, श्रीमती सुषमा सिंह, पूर्व प्रधान श्याम बहादुर सिंह बबलू, श्रीमती किरन सिंह, मुन्ना सिंह, श्रीमती कमलेश सिंह, चंद्र मौल सिंह, राजेंद्र बहादुर सिंह, केके पांडेय, अतुल सिंह, वीरेंद्र सिंह, कृष्ण बहादुर सिंह, राम बहादुर सिंह, राजू सिंह, मनोज द्विवेदी और राजेश कुमार सिंह सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने कथा का श्रवण कर पुण्यलाभ अर्जित किया।