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कजरी: आवा लड़ल जाई गांव मा परधानी पिया, बदले जिंदगानी पिया न

सुरेश मिश्र

Aug 11, 2026 • 12 Views

कजरी: आवा लड़ल जाई गांव मा परधानी पिया, बदले जिंदगानी पिया न

 

 

कजरी
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आवा लड़ल जाई गांउ मा परधानी पिया
बदले जिंदगानी पिया न

प्रियतम परदेश में रहते हैं। नायिका गांव में अकेले ही रहती है। वह हमेशा कड़की का रोना रोते रहते हैं। पढ़ी लिखी पत्नी ने प्रियतम को फोन करके समझाया -

आवा लड़ल जाई गांउ मा परधानी पिया
बदले जिंदगानी पिया न।

छत पे सोलरवा लगउबइ
बिजुली देश क बचउबइ
रहल जाई एसी में दुनउं परानी पिया
बदले जिंदगानी पिया न।

नकदी फसल के बहार
पइसा आई बेशुमार
तार घेरि-घेरि कइ जाई किसानी पिया
बदले जिंदगानी पिया न।

मिले नवा रोजगार
खतम होई भ्रष्टाचार
केउ क चले नाहीं गाउं में मनमानी पिया
बदले जिंदगानी पिया न।

जाति-पाति कइ लड़इया
अब न होइ पाई सइयां
नव विकास से गढ़ब नई कहानी पिया
बदले जिंदगानी पिया न।

दइ गरीब के आवास
मिलि करब खड़ंजा पास
घरे-घरे नल से दिहल जाई पानी पिया
बदले जिंदगानी पिया न।

सुना-सुना हे सुरेश
लउटि आवा अपने देश
गांउ में भी मिलि सकेला दाना-पानी पिया
बदले जिंदगानी पिया न।

रचनाकार: सुरेश मिश्र
संपर्क: 9869141831

 

 

 

 

 

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