आनंद विहीन हुई यूबीटी
रचनाकार: सुरेश मिश्र
व्यंग्यात्मक कविता
यूबीटी को त्यागकर, निकल पड़े आनंद,
तिलचट्टे आदर्श हों, वहाँ कहाँ आनंद।
वहाँ कहाँ आनंद, जहाँ आनंद रहेगा,
लिखकर रख लो यार, वहीं आनंद रहेगा।
कह सुरेश कविराय, न बुझने पाए अँगीठी,
अब आनंद विहीन हो गई है यूबीटी।
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