हितेंद्र ठाकूर: संघर्ष से संगठन तक, वसई-विरार की राजनीति में तीन दशक का सफर

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SKShukla

Oct 02, 2026 • 158 Views

हितेंद्र ठाकूर: संघर्ष से संगठन तक, वसई-विरार की राजनीति में तीन दशक का सफर

हितेंद्र ठाकूर: संघर्ष से संगठन तक, वसई-विरार की राजनीति में तीन दशक का सफर

विरार। वसई-विरार की राजनीति को समझने के लिए केवल चुनावी नतीजों पर नजर डालना पर्याप्त नहीं है। इस क्षेत्र की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय संगठनों, स्थानीय जनसंपर्क और कार्यकर्ताओं के नेटवर्क की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसी संदर्भ में बहुजन विकास आघाड़ी (बविआ) के नेता हितेंद्र ठाकूर का राजनीतिक सफर उल्लेखनीय रहा है। 3 अक्टूबर को उनके जन्मदिन के अवसर पर उनके तीन दशक से अधिक लंबे राजनीतिक सफर, संगठन निर्माण और क्षेत्रीय राजनीति में उनकी भूमिका की चर्चा फिर से हो रही है।

विद्यार्थी जीवन से शुरू हुआ सार्वजनिक जीवन

हितेंद्र ठाकूर की सार्वजनिक जीवन में सक्रियता विद्यार्थी जीवन से शुरू हुई। वर्तक महाविद्यालय में पढ़ाई के दौरान सामाजिक और छात्र गतिविधियों से उनका जुड़ाव बढ़ा। स्थानीय लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझने और क्षेत्रीय स्तर पर काम करने का अनुभव आगे चलकर उनकी राजनीतिक गतिविधियों का आधार बना।

1990 के दशक में उन्होंने सक्रिय राजनीति में अपनी पहचान बनानी शुरू की। उस दौर में वसई-विरार आज की तरह तेजी से विकसित हो रहा महानगरीय क्षेत्र नहीं था। पानी, सड़क, परिवहन, शिक्षा, रोजगार और अन्य बुनियादी सुविधाएं स्थानीय राजनीति के प्रमुख मुद्दे थे। इन्हीं स्थानीय सवालों को केंद्र में रखकर राजनीतिक संगठन को मजबूत करने की दिशा में काम शुरू हुआ।

बविआ के विस्तार के साथ मजबूत हुआ संगठन

इसी दौर में बहुजन विकास आघाड़ी का विस्तार हुआ। धीरे-धीरे संगठन ने वसई-विरार की स्थानीय राजनीति में अपनी जगह बनाई। चुनाव दर चुनाव कार्यकर्ताओं का नेटवर्क बढ़ता गया और बविआ क्षेत्र की प्रमुख राजनीतिक ताकतों में शामिल हो गई।

हितेंद्र ठाकूर की राजनीति में स्थानीय संपर्क और संगठन को विशेष महत्व दिया गया। नगर निकाय से लेकर विधानसभा स्तर तक स्थानीय मुद्दों को राजनीतिक विमर्श में रखने की कोशिश उनकी कार्यशैली का हिस्सा रही। वार्ड स्तर पर कार्यकर्ताओं के जरिए लोगों से संपर्क बनाए रखना और स्थानीय समस्याओं को राजनीतिक मंच पर उठाना संगठन की गतिविधियों में दिखाई देता रहा।

विधानसभा की राजनीति में लंबा अनुभव

विधानसभा की राजनीति में भी हितेंद्र ठाकूर का लंबा अनुभव रहा है। वसई क्षेत्र में बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच अपनी राजनीतिक उपस्थिति बनाए रखना उनके सफर का प्रमुख हिस्सा रहा। लंबे समय से उनके साथ जुड़े कार्यकर्ताओं का नेटवर्क भी बविआ के संगठनात्मक ढांचे की महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है।

वसई-विरार के तेजी से शहरीकरण के साथ क्षेत्र की समस्याओं का स्वरूप भी बदला। ग्रामीण इलाकों से विकसित होते शहरी क्षेत्र तक पानी, सड़क, यातायात, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मुद्दे लगातार राजनीतिक चर्चा के केंद्र में रहे। इन स्थानीय विषयों को लेकर संगठन को सक्रिय रखना हितेंद्र ठाकूर की राजनीति की प्रमुख विशेषताओं में शामिल रहा है।

स्थानीय राजनीति में संगठन की भूमिका

वसई-विरार में बविआ की राजनीतिक गतिविधियां केवल चुनावी समय तक सीमित नहीं रहीं। वार्ड स्तर से विधानसभा क्षेत्र तक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी और स्थानीय संपर्क संगठन की राजनीति का आधार रहे हैं।

2026 में हुए वसई-विरार महानगरपालिका चुनाव में बविआ ने 115 में से 71 सीटों पर जीत दर्ज की। इस परिणाम के बाद महानगरपालिका में पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिला। चुनावी परिणाम के संदर्भ में संगठन के लंबे समय से चले आ रहे ढांचे और कार्यकर्ताओं की सक्रियता को भी महत्वपूर्ण माना गया।

सहकार क्षेत्र में भी सक्रियता

हितेंद्र ठाकूर की राजनीतिक गतिविधियों का दायरा विधानसभा और महानगरपालिका की राजनीति तक ही सीमित नहीं रहा। सहकार क्षेत्र में भी उनके नेतृत्व से जुड़े पैनल ने चुनावों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। सहकार क्षेत्र के चुनाव में 21 में से 16 सीटों पर जीत का परिणाम भी संगठन के प्रभाव और कार्यकर्ताओं की सक्रियता के संदर्भ में देखा गया।

समर्थकों के बीच ‘आप्पा’ नाम से पहचान

स्थानीय राजनीति में नेताओं की पहचान केवल उनके पद और चुनावी प्रदर्शन से नहीं होती। समर्थकों और कार्यकर्ताओं के बीच इस्तेमाल होने वाला संबोधन भी उनकी स्थानीय पहचान का हिस्सा बन जाता है। वसई-विरार में हितेंद्र ठाकूर को लंबे समय से ‘आप्पा’ के नाम से संबोधित किया जाता है। कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच यह नाम उनकी क्षेत्रीय पहचान का हिस्सा बन चुका है।

बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच कायम रही मौजूदगी

तीन दशक से अधिक के राजनीतिक सफर में वसई-विरार की राजनीति में कई बदलाव आए। क्षेत्र का तेजी से शहरीकरण हुआ, नए राजनीतिक चेहरे सामने आए और राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक दलों की सक्रियता भी बढ़ी। इन बदलावों के बीच बविआ ने स्थानीय राजनीति में अपनी संगठनात्मक मौजूदगी बनाए रखी।

हितेंद्र ठाकूर के राजनीतिक सफर को केवल चुनावी जीत-हार के आंकड़ों के आधार पर देखना इस यात्रा का पूरा चित्र नहीं देता। संगठन निर्माण, कार्यकर्ताओं के साथ लंबे समय के संबंध, स्थानीय मुद्दों पर सक्रियता और बदलते वसई-विरार के राजनीतिक परिदृश्य के साथ अपनी भूमिका बनाए रखना उनके सफर के प्रमुख पहलू रहे हैं।

3 अक्टूबर को जन्मदिन के अवसर पर उनके राजनीतिक सफर को याद करते हुए वसई-विरार की राजनीति में उनकी भूमिका, संगठनात्मक गतिविधियों और लंबे जनसंपर्क की चर्चा हो रही है। क्षेत्र की राजनीति आने वाले समय में किस दिशा में जाती है, यह भविष्य के राजनीतिक घटनाक्रम तय करेंगे। हालांकि, वसई-विरार की स्थानीय राजनीति के पिछले तीन दशकों के इतिहास में हितेंद्र ठाकूर का राजनीतिक सफर एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में देखा जाता है।

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