बिलग्राम में आलू की खेती से किसानों का मोहभंग, सरसों और मटर की बुआई बढ़ी
नरेन्द्र शुक्ल / संवाददाता
हरदोई। आलू की खेती में बढ़ती लागत और मुनाफे को लेकर अनिश्चितता के बीच हरदोई जिले के बिलग्राम क्षेत्र में किसानों का रुझान बदलता नजर आ रहा है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार आलू की बुआई कम होने की बात सामने आ रही है। वहीं, किसान सरसों और मटर की खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं। क्षेत्र के कई गांवों में इन फसलों की बुआई पर जोर दिया गया है।
किसानों के इस बदलाव के पीछे खेती की बढ़ती लागत, उपज का उचित मूल्य मिलने की चिंता और बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव को प्रमुख कारण माना जा रहा है। आलू की खेती में बीज, खाद, सिंचाई, कीटनाशक, मजदूरी, खुदाई और भंडारण पर काफी खर्च होता है। ऐसे में बाजार में अपेक्षित भाव नहीं मिलने पर किसानों के लिए लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है।
इसके मुकाबले किसान सरसों और मटर की खेती को विकल्प के रूप में देख रहे हैं। सरसों की बुआई बढ़ने से खाद्य तेलों के उत्पादन और उनकी कीमतों को लेकर भी चर्चा हो रही है। हालांकि, भविष्य में खाद्य तेलों की कीमतों में कमी आएगी या नहीं, यह सरसों के उत्पादन, बाजार की मांग और अन्य आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
बिलग्राम क्षेत्र में आलू की खेती का रकबा घटने और सरसों व मटर की बुआई बढ़ने से स्थानीय कृषि व्यवस्था में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि, इन फसलों के रकबे में हुए बदलाव का आकलन करने के लिए आधिकारिक आंकड़ों की जरूरत है। इनके उपलब्ध होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आलू की खेती में कितनी कमी आई है और सरसों व मटर की बुआई कितनी बढ़ी है।
फिलहाल, किसान फसलों की लागत, संभावित पैदावार और बाजार भाव को ध्यान में रखकर खेती की रणनीति तय कर रहे हैं। अब उनकी निगाहें सरसों और मटर की पैदावार, फसलों के बाजार मूल्य और सरकारी योजनाओं से मिलने वाले लाभ पर टिकी हैं।
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