मतदाता सूची में गड़बड़ी को लेकर ज्ञानेश कुमार पर डॉ. सी.पी. जोशी का हमला, चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए सवाल

सैय्यद जाहिद अली रियासत

मुंबई। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. सी.पी. जोशी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और फॉर्म-6, 7 व 8 में कथित नियमविरुद्ध बदलावों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता, पारदर्शिता और संवैधानिक प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया कानून के अनुरूप तथा जवाबदेह होनी चाहिए।

डॉ. जोशी मुंबई कांग्रेस कार्यालय राजीव गांधी भवन में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान के तहत आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष एवं सांसद वर्षा गायकवाड़, प्रवक्ता और मीडिया समन्वयक सुरेशचंद्र राजहंस, जिला अध्यक्ष रवि बावकर, कचरू यादव, अरशद आजमी, भावना जैन, राजपति यादव, केतन शाह, शीतल म्हात्रे सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

डॉ. जोशी ने आरोप लगाया कि एसआईआर के नाम पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं और फॉर्म-6, 7 तथा 8 में ऐसे बदलाव किए गए हैं, जिनकी वैधानिकता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने दावा किया कि फॉर्म-6 में बदलाव करने का अधिकार संसद के पास है, लेकिन चुनाव आयोग ने नियमों से परे जाकर कार्रवाई की। उन्होंने निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ) के अधिकारों और सूचना प्रौद्योगिकी महानिदेशक सीमा खन्ना को अधिकार दिए जाने के मुद्दे पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण, फॉर्म-6 में बदलाव और दो चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज आपत्तियों से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, निर्णय लेने की प्रक्रिया और पारदर्शिता को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हुए हैं। डॉ. जोशी ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार की चयन प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई।

कांग्रेस नेता ने बिहार, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और महाराष्ट्र में मतदाता सूची तथा चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठे विवादों का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि बिहार में एसआईआर के दौरान करीब 47 लाख और पश्चिम बंगाल में 90 लाख से अधिक नाम हटाए गए। उन्होंने परिसीमन विधेयक और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने से जुड़ी चर्चाओं पर भी चिंता जताई।

डॉ. जोशी ने कहा कि मतदान का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद है। मतदाता सूचियों का सटीक होना जरूरी है, लेकिन इसके लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया पारदर्शी, कानूनी और जवाबदेह होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मतदाता सूची से नाम हटाने के दौरान प्रत्येक पात्र नागरिक के अधिकारों की रक्षा की गई और क्या चुनाव आयोग अपने फैसलों को सत्यापन योग्य रिकॉर्ड के आधार पर साबित कर सकता है। उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं को स्वतंत्र और संविधान के प्रति जवाबदेह बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सांसद वर्षा गायकवाड़ ने भी चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या में हुई बढ़ोतरी और भाजपा उम्मीदवारों की जीत के अंतर के बीच संबंध की जांच होनी चाहिए। उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच पांच-छह महीने में करीब 40 लाख मतदाताओं के बढ़ने तथा प्रत्येक मतदान केंद्र पर लगभग 400 मतदाताओं की बढ़ोतरी का दावा किया।

गायकवाड़ ने यह भी आरोप लगाया कि मुंबई में एसआईआर के दौरान लाखों मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए देशव्यापी अभियान चला रही है। उनके मुताबिक, इसी क्रम में 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन की बड़ी रैली आयोजित की जाएगी।

कांग्रेस नेताओं ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की जांच, चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा की मांग उठाई।