मुंबई अग्निकांड से बंगाल के स्वर्णशिल्पियों पर संकट, धनतेरस-दीपावली के ऑर्डर अटके

सूर्यप्रकाश दुबे

मुंबई। मुंबई के प्रसिद्ध भुलेश्वर रोड इलाके में गुरुवार को हुए भीषण अग्निकांड के बाद पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के घाटाल उपमंडल से जुड़े सैकड़ों स्वर्णशिल्पियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। आग से प्रभावित बहुमंजिला इमारत बंद होने और बिजली आपूर्ति ठप रहने के कारण आभूषण बनाने का काम रुक गया है। ऐसे में धनतेरस और दीपावली के लिए मिले ऑर्डर समय पर पूरे करने को लेकर कारीगरों और कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है।

इमारत में फंसे सोना, तैयार गहने और उपकरण

घाटाल और दासपुर क्षेत्र के बड़ी संख्या में युवा मुंबई के भुलेश्वर इलाके में सोने के आभूषण बनाने का काम करते हैं। गुरुवार को इमारत की पहली मंजिल पर अचानक आग लगने के समय वहां कई कारीगर, व्यापारी और ग्राहक मौजूद थे। प्रशासन और स्थानीय लोगों की तत्परता से सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

हालांकि, अफरा-तफरी के बीच कई स्वर्णशिल्पियों का सोना, तैयार आभूषण और काम में इस्तेमाल होने वाले कीमती उपकरण इमारत के अंदर ही रह गए। फिलहाल भवन कब खुलेगा और बिजली आपूर्ति कब बहाल होगी, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसके चलते कारीगर दोबारा काम शुरू नहीं कर पा रहे हैं।

त्योहारी सीजन में ऑर्डर पूरे करने की चिंता

दासपुर के आदमपुर निवासी स्वर्ण कारोबारी गणेश पांजा ने बताया कि उनकी कार्यशाला इसी इमारत में है, जहां 10 से 12 कारीगर काम करते हैं। उनके मुताबिक, बाजार में आभूषणों की अच्छी मांग थी और धनतेरस व दीपावली के लिए कई ऑर्डर मिले थे। कुछ आभूषणों की डिलीवरी दो दिन बाद ही करनी थी, लेकिन आग की घटना के कारण पूरा काम रुक गया है।

दासपुर के कुलटिकरी निवासी विमल सामंत और बाबाई मान्ना तथा घाटाल के तपन जाना ने बताया कि त्योहारों के दौरान अतिरिक्त काम मिलने से कारीगरों को सालभर की आमदनी के मुकाबले बेहतर कमाई का अवसर मिलता है। ऐसे में काम बंद होने से उनकी आर्थिक योजनाएं प्रभावित हुई हैं। कई कारीगर काम करने के साथ-साथ रात में भी इसी इमारत में रहते थे। अब वे काम दोबारा शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं।

कल्याण संघ ने की रहने की व्यवस्था

अग्निकांड के बाद प्रभावित स्वर्णशिल्पियों की मदद के लिए मुंबई स्थित बंगाली स्वर्णशिल्पी कल्याण संघ आगे आया है। कुछ कारीगरों के रहने की व्यवस्था संघ के कार्यालय में की गई है, जबकि अन्य अपने दोस्तों और परिचितों के यहां रह रहे हैं।

संघ के महासचिव कालीदास सिंह राय ने कहा कि आगामी त्योहारों और कार्यक्रमों के कारण काम का दबाव काफी अधिक था। इस घटना ने कारीगरों की पूरी व्यवस्था बिगाड़ दी है। उन्होंने बताया कि जब तक इमारत की सुरक्षा जांच पूरी नहीं होती और बिजली आपूर्ति बहाल नहीं की जाती, तब तक काम शुरू करना संभव नहीं होगा।

फिलहाल स्वर्णशिल्पियों की निगाहें इमारत दोबारा खुलने और कामकाज बहाल होने पर टिकी हैं। उन्हें चिंता है कि यदि जल्द काम शुरू नहीं हुआ, तो धनतेरस और दीपावली के लिए मिले आभूषणों के ऑर्डर समय पर पूरे करना मुश्किल हो सकता है।