बच्चों को सनातन धर्म और संस्कृति के संस्कार देना माता-पिता का दायित्व : महंत राजेंद्र पुरी

अश्विनी वालिया

कुरुक्षेत्र, । जग ज्योति दरबार के महंत राजेंद्र पुरी ने कहा कि त्योहारों को केवल औपचारिकता या मनोरंजन तक सीमित नहीं रखना चाहिए। भारतीय संस्कृति और परंपराओं में प्रत्येक त्योहार एवं उत्सव का अपना विशेष महत्व और इतिहास है। ऐसे में बच्चों को त्योहारों के महत्व के साथ सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति की शिक्षा देना भी आवश्यक है।

त्योहारों के मौसम में महंत राजेंद्र पुरी लगातार सनातन धर्म प्रचार अभियान चला रहे हैं। इस दौरान वे लोगों को भारतीय परंपराओं, धार्मिक मान्यताओं और संस्कारों के महत्व के प्रति जागरूक कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि माता-पिता को बच्चों के लिए समय निकालकर उन्हें धर्म, संस्कृति और नैतिक मूल्यों की शिक्षा देनी चाहिए।

महंत राजेंद्र पुरी ने कहा कि प्रत्येक घर में श्रीमद्भगवद्गीता और रामचरितमानस जैसी धार्मिक पुस्तकें अवश्य होनी चाहिए। आधुनिक युग में बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ मंदिर में दर्शन, धार्मिक पूजा-पद्धतियों और भारतीय परंपराओं की जानकारी देना भी जरूरी है। बच्चों को समय रहते अच्छे संस्कार दिए जाएं, ताकि वे नैतिकता, ईमानदारी और बड़ों के सम्मान का महत्व समझ सकें। इससे एक संस्कारित समाज के निर्माण में भी मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि संस्कारवान बच्चे माता-पिता और परिवार की प्रतिष्ठा बढ़ाते हैं, जबकि गलत संस्कार परिवार के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं। महंत राजेंद्र पुरी के अनुसार, लंबे समय तक पराधीनता के बावजूद भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं कायम रहीं, क्योंकि परिवारों में बच्चों को धर्म और संस्कृति से जुड़े संस्कार दिए जाते थे।

उन्होंने कहा कि बच्चों को धार्मिक और नैतिक शिक्षा देना माता-पिता की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। यदि वर्तमान पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और संस्कारों से जोड़ा जाए, तो भविष्य में एक नैतिक, ईमानदार और जिम्मेदार समाज की स्थापना की जा सकती है।

फोटो परिचय: जग ज्योति दरबार के महंत राजेंद्र पुरी।