सुरेश मिश्र
महंगाई बढ़ रही है, ज्यों हनुमत की पूंछ,
आम आदमी की नहीं, किसी घाट पर पूछ।
किसी घाट पर पूछ, समझ में सबको आता,
मैं सुभाष चंद्रा होता तो क्या हो जाता।
कह सुरेश—सीएनजी, शुगर, प्याज सिखाई,
केवल निर्धन खातिर होती है महंगाई।