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13 साल की अविस्मरणीय प्रशासनिक यात्रा को विराम, IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने दिया इस्तीफा

शिवशंकर शुक्ल

Aug 30, 2026 • 86 Views

13 साल की अविस्मरणीय प्रशासनिक यात्रा को विराम, IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने दिया इस्तीफा

नई दिल्ली। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की अधिकारी दिव्या मित्तल ने अपनी 13 वर्षों की प्रशासनिक यात्रा को विराम देते हुए IAS सेवा से त्यागपत्र देने की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की है। उन्होंने अपनी पोस्ट में अपने प्रशासनिक जीवन के अनुभवों, संघर्षों, उपलब्धियों और आम लोगों से मिले स्नेह को भावुक शब्दों में याद किया।

दिव्या मित्तल ने अपनी पोस्ट की शुरुआत करते हुए लिखा कि उन्होंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है। उन्होंने बताया कि साधारण परिवेश में रहते हुए उन्होंने एक अच्छे और सफल जीवन का सपना देखा था। IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ाई के बाद उन्हें लंदन में नौकरी करने का अवसर मिला, लेकिन अपने देश में न होना उन्हें खलता रहा।

उन्होंने अपने संदेश में कहा कि उनकी पढ़ाई, आत्मविश्वास और दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताकत उनकी मिट्टी का कर्ज थी। इसी कर्ज को चुकाने की भावना के साथ वह भारत लौटीं और IAS अधिकारी बनने का अवसर मिला।

प्रशासनिक सेवा में मिले अनुभवों को किया याद

अपने सेवाकाल को याद करते हुए दिव्या मित्तल ने लिखा कि उन्हें बहुत कुछ करने और बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि सही के साथ खड़ा होना कोई विकल्प नहीं बल्कि कर्तव्य है।

उन्होंने मिर्जापुर और मां विंध्यवासिनी से जुड़े अपने अनुभवों को भी विशेष रूप से याद किया। उनके अनुसार, मिर्जापुर ने उन्हें यह सीख दी कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं बल्कि केवल एक राय है। वहीं मां विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर उन्होंने यह सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं बल्कि कृपा और लोगों के विश्वास से आती है।

लोगों के संघर्षों को बताया सबसे बड़ी सीख

दिव्या मित्तल ने अपनी पोस्ट में आम लोगों के साथ काम करने के अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके लिए सबसे बड़ी सीख यह रही कि अपने लिए देखे गए सपने पूरे करने के बाद अब अपने लोगों के लिए देखे गए सपनों को जीना था।

उन्होंने उस परिवार का भी जिक्र किया, जिसे पहली बार जमीन का हक मिला, उस दिव्यांग व्यक्ति का उल्लेख किया जिसे सम्मान के साथ जीने का अवसर मिला और उस किसान की बात की, जिसके खेत तक पानी पहुंचा। उनके अनुसार, इन लोगों के संघर्षों के साथ चलते हुए उन्होंने महसूस किया कि हर सरकारी फाइल के पीछे एक व्यक्ति होता है और उसकी गरिमा बनाए रखना न्याय का हिस्सा है।

सहयोगियों और कर्मचारियों का जताया आभार

अपने संदेश में उन्होंने अपने सहयोगियों, अधिकारियों और कर्मचारियों के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने उनके कंधे से कंधा मिलाकर काम किया और हर परिस्थिति में साथ दिया।

उन्होंने लिखा कि उन्हें लोगों से इतना प्यार, सम्मान और अपनापन मिला कि उनकी झोली पूरी तरह भर गई। जब वह खुद थकी या टूटी हुई थीं, तब भी लोगों ने उन्हें उसी विश्वास के साथ देखा और आगे बढ़ते रहने की हिम्मत दी।

भावुक शब्दों में कहा—पद छूट गया, सपना नहीं

अपनी पोस्ट के अंत में दिव्या मित्तल ने भावुक होते हुए अपने जीवन से जुड़े एक दृश्य का उल्लेख किया। उन्होंने लहरिया दह की पहाड़ी की एक वृद्ध महिला का जिक्र किया, जो उनके गांव में पहली बार पानी पहुंचता देखकर कुछ नहीं बोलीं और कांपते हाथों से उनका सिर छूकर आशीर्वाद दिया।

उन्होंने लिखा कि पद आज भले ही छूट गया हो, लेकिन वह स्पर्श जीवन भर उनके साथ रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि देश की मिट्टी ने उन्हें जो सपना दिया है, वह सपना कभी नहीं छूटेगा।

दिव्या मित्तल की इस भावुक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद उनके समर्थकों और शुभचिंतकों की ओर से बड़ी संख्या में प्रतिक्रियाएं सामने आईं। पोस्ट पर हजारों लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाएं देते हुए उनके अगले सफर के लिए शुभकामनाएं दीं।

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