रवीन्द्र मिश्रा

मुंबई। हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार, 8 अक्टूबर को 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। गोवा स्थित अपने आवास पर कार्डियक अरेस्ट के बाद उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। अस्पताल के अनुसार उन्हें सुबह करीब 5:20 बजे मृत घोषित किया गया।

फिल्मी पर्दे पर अपने दमदार अभिनय से ‘प्रहार’, ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’ और ‘नटसम्राट’ जैसी फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाने वाले नाना पाटेकर ने करीब पांच दशक तक दर्शकों के दिलों पर राज किया। उनकी संवाद अदायगी, अभिनय की तीव्रता और अलग अंदाज ने उन्हें हिंदी और मराठी सिनेमा के विशिष्ट कलाकारों में शामिल किया।

नाना पाटेकर का जन्म महाराष्ट्र में हुआ था। आर्थिक कठिनाइयों के बीच उन्होंने कम उम्र में ही काम करना शुरू कर दिया था। कला के प्रति रुचि के चलते उन्होंने जे. जे. स्कूल ऑफ आर्ट से शिक्षा प्राप्त की। अभिनय के प्रति उनका रुझान उन्हें रंगमंच तक ले गया, जहां से उन्होंने फिल्मों की दुनिया में अपनी पहचान बनाई। वर्ष 1978 में फिल्म ‘गमन’ से उनके फिल्मी सफर की शुरुआत हुई और आगे चलकर उन्होंने गंभीर से लेकर लोकप्रिय सिनेमा तक कई यादगार किरदार निभाए।

‘परिंदा’ और ‘क्रांतिवीर’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को विशेष सराहना मिली। ‘क्रांतिवीर’ के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला। अभिनय के क्षेत्र में उनके योगदान को वर्ष 2013 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। रंगमंच और निर्देशन के क्षेत्र में भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।

नाना पाटेकर सिर्फ अभिनेता के रूप में ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों के लिए भी जाने जाते थे। उन्होंने नाम फाउंडेशन के माध्यम से किसानों और जल संरक्षण से जुड़े कार्यों में योगदान दिया। उनके निधन से हिंदी और मराठी फिल्म जगत के साथ सामाजिक क्षेत्र में भी शोक की लहर है।

नाना पाटेकर के निधन की खबर से उनके प्रशंसकों और फिल्म जगत में गहरा शोक है। उनकी दमदार आवाज, प्रभावशाली संवाद अदायगी और यादगार किरदार लंबे समय तक दर्शकों की स्मृतियों में जीवित रहेंगे।