सैय्यद जाहिद अली रियासत
मुंबई। मुंबई की झोपड़पट्टी परिसरों में रहने वाले गरीब, मेहनतकश, वंचित, शोषित, पिछड़े वर्ग तथा विभिन्न राज्यों से रोजगार के लिए मुंबई आए परिवारों के आश्रय के प्रश्न को केवल अवैध निर्माण के विषय के रूप में नहीं देखने की मांग सामाजिक कार्यकर्ता संजय रमेश भालेराव ने की है। उन्होंने शासन से इस मुद्दे पर मानवीय, सामाजिक और पुनर्वास के दृष्टिकोण से विचार करने का आग्रह किया है।
भालेराव के अनुसार मुंबई की कई झोपड़पट्टियों में नागरिक 50 से 60 वर्षों से रह रहे हैं। समय के साथ परिवारों की संख्या बढ़ी और नई पीढ़ियां भी वहीं रहने लगीं। जमीन की कमी और घरों की बढ़ती कीमतों के कारण कई गरीब परिवारों के लिए स्वतंत्र आवास लेना संभव नहीं हो पाया। ऐसे में कुछ परिवारों ने सीमित जगह में अपनी झोपड़ी के ऊपर अतिरिक्त मंजिल या मचान बनाकर रहने की व्यवस्था की।
उन्होंने मांग की कि मुंबई की झोपड़पट्टियों में 14 से 18 फीट ऊंचाई तक के मौजूदा निर्माणों पर तोड़क कार्रवाई तत्काल स्थगित की जाए। इन निर्माणों का विशेषज्ञ इंजीनियरों के माध्यम से स्ट्रक्चरल ऑडिट और अग्नि सुरक्षा जांच कराई जाए तथा मानवीय और सामाजिक दृष्टिकोण से संरक्षण के संबंध में विशेष नीति तैयार की जाए।
उन्होंने निर्माण की मजबूती, अग्नि सुरक्षा, प्रकाश और हवा, रास्ते या गली की उपलब्ध चौड़ाई तथा आपातकालीन प्रवेश जैसे सुरक्षा मानदंडों को ध्यान में रखते हुए झोपड़पट्टियों के लिए अधिकतम ऊंचाई सीमा 22 फीट तक करने की व्यवहार्यता की जांच की मांग की। साथ ही कई दशकों से मौजूद और आवासीय उपयोग में आ रहे निर्माणों के लिए नियमितीकरण या संरक्षण योजना तैयार करने की मांग रखी।
भालेराव ने कहा कि किसी भी तोड़क कार्रवाई से पहले संबंधित परिवारों को उचित नोटिस, व्यक्तिगत सुनवाई और दस्तावेज प्रस्तुत करने का पर्याप्त अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने पुनर्विकास क्षेत्रों की तरह अन्य झोपड़पट्टियों में ऊपरी मंजिलों पर रहने वाले वास्तविक निवासियों का सर्वेक्षण और पुनर्वास करने के प्रश्न पर भी स्वतंत्र रूप से विचार करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों के लिए सुरक्षित और स्थायी आश्रय एक बुनियादी सामाजिक आवश्यकता है। महाराष्ट्र शासन, नगर विकास विभाग और बृहन्मुंबई महानगरपालिका द्वारा संयुक्त रूप से अध्ययन कर 14 से 18 फीट ऊंचाई वाले आवासीय निर्माणों पर तोड़क कार्रवाई अस्थायी रूप से रोकने तथा सुरक्षा शर्तों के साथ 22 फीट तक ऊंचाई की अनुमति या नियमितीकरण के संबंध में विशेष नीति तैयार की जाए।